प्रतिष्ठान के खँडहर में और गंगा-तट की सिकता-भूमि में अनेक शिविर और फूस के झोंपड़े खड़े हैं। माघ की अमावस्या की गोधूली में प्रयाग में बाँध पर प्रभात का-सा जनरव और कोलाहल तथा धर्म लूटने की धूम कम हो गयी है; परन्तु बहुत-से घायल और कुचले हुए अर्धमृतकों की आर्तध्वनि उस पावन प्रदेश को आशीर्वाद दे रही है। स्वयं-सेवक उन्हें सहायता पहुँचाने में व्यस्त हैं। यों तो प्रतिवर्ष यहाँ पर जन-समूह एकत्र होता है, पर अब की बार कुछ विशेष पर्व की घोषणा की गयी थी, इसलिए भीड़ अधिकता से हुई।
कितनों के हाथ टूटे, कितनों का सिर फूटा और कितने ही पसलियों की हड्डियाँ गँवाकर, अधोमुख होकर त्रिवेणी को प्रणाम करने लगे। एक नीरव अवसाद संध्या में गंगा के दोनों तट पर खड़े झोंपड़ी...
- Available now
- Always Available Romance
- New eBook additions
- New kids additions
- New teen additions
- Most popular
- Explore Your Family History
- Try something different
- Always Available Classics
- Sci-Fact or Sci-fi?
- Not just Superhero stuff: Alternative Comix
- Comics & Graphic Novels
- See all ebooks collections
- Just added - Audiobooks
- Available now
- New Audiobooks - Teen
- New Audiobooks - Kids
- Most popular
- Try something different
- Christmas Stories
- See all audiobooks collections